What Does Affirmation Mean?



वह स्त्री बिलकुल चुड़ैल थी। सब उससे नफरत करते थे। पर राजकुमार उसपर मुग्ध था। उसे इस चुड़ैल का इतना मोह हो गया था कि इसके लिए जान देने को भी तैयार था।

जब मालिक ने खरबूजा खाया तो कड़वाहट से कष्ठ में चिरमिराहट लगने लगी और जीभ में छाले पड़ गये। घंटे-भर तक मुंह का स्वाद बिगड़ा रहा। तब उसने आश्चर्य के साथ हजरत मुकमान से पूछा, "ऐ दोसत, तूने इस जहर को किस तरह खाया और इस विष को अमृत क्यों समझ लिया?

[बाज की तरह आदमी भी, अपने स्वामी परमात्मा को छोड़कर दु:ख उठाता हैं। संसार की माया उसे पंगु बना देती है और मूर्ख मनुष्य अपनी मूर्खता के कामों को भी बुद्धिमानी का कार्य समझते हैं।] १

"और देख, इसको पानी भी पिलाना; परन्तु थोड़ा गर्म करके देना।"

आशा न रक्खो। जो मनुष्य शैतान के धोखे में फंसकर लाहौल खाता है, वह खच्चर की तरह मार्ग में सिर के बल गिरता है। किसी के धोखे में नहीं आना चाहिए। कुपात्रों की सेवा ऐसी होती है, जैसी इस सेवक ने की। ऐसे अनधिकारी लोगों के धोखे में आने से बिना नौकर के रहना ही अच्छा है।]१

मौलवी ने कहा, "तुझे निस्सन्देह मारने का अधिकार है। कोई कसर उठा न रखा। जो अपनों से अलग हो जाये, उसकी यही सजा है। इतना ही नहीं, बल्कि इससे भी सौगुना दण्ड मिलना चाहिए। मैं अपने निजी बचाव के लिए अपने साथियों से मैं हूँ ५ बार बोलो क्यों अलग हुआ?"

ईंट की दीवार / जलालुद्दीन रूमी (विकिपीडिया)

जब उसेन अपने पेट से सांप को बाहर निकलते देखा तो डर का कारण थर-थर कांपने लगा। शरीर में जो पीड़ा घूंसों की मार से उत्पन्न हो गयी थी, वह तुरन्त जाती रही।

[दया की तलवार सममुच check here लोहे की तलवार से श्रेष्ठ है।] १

गृहस्वामी ने यह आवाज सुनी तो उसे डर लगने लगा। सोचने लगा, शायद दूसरे चोर ने किसी को मार डाला है या हो सकता है, वह मुझपर भी पीछे से टूट पड़। हो सकता है कि बाल-बच्चों पर भी हाथ साफ करे। तो फिर इस चोर के पकड़ने से क्या लाभ होगा?

[हे आत्मन्! तू केवल परमात्मा का प्रेमी बन और माया-रूपी दुनिया कितनी सुन्दर हो, उससे मन न लगा, यहां तक कि सिवा परमात्मा के किसी से भी इच्छा न कर। न किसी के स्पर्श करने की कामना कर। किसी की गन्ध तक मल ले और न उसके अतिरिक्त किसी का ध्यान कर। तू भ्रम-जाल में फंसेगा तो उस परमात्मा के हाथों हानि उठायेगा] १

तेरी माया तू ही जाने। मैं इस website चमत्कार को छिपाता हूं और तू प्रकट करता है।

ऊंट को दया आयी और कहा, "अच्छा, मेरे कोहान पर चढ़कर बैठ जा। इस तरह आर-पार होना मेरा काम है। तुझ जैसे हजारों को नदी पार करा चुका हूं।"

सुलेमान ने कहा, "बहुत बच्छा, हम तुम्हारा इंसाफ करते हैं, मगर दूसरे पक्ष का होना भी जरूरी है!

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